आँखों की विडम्बना
this one is dedicated to those who cant see their loved ones' moist eyes.... कल इन आँखों में एक सपना था जो आज भी है , पर कल इस सपने को पूरा होने की एक आस थी , जो आज नहीं है। कैसे समझाऊ इस दिल को की वो राज़ आँखों को न बताये, पर जब दिल दिमाग की सुने ही न तो उसे कौन समझाए? क्या करे गलती दिल की भी नहीं है ये तो बस उसकी आदत है की वो बातें बता ही देता है या कहें की उसकी मज़बूरी है की वो आँखों से कुछ छुपा नहीं सकता या कहें की उसका प्यार है इन आँखों से जिसमे कोई राज़ रह ही नहीं सकता हम तो सारे राज़ दिल में दबा के रख लेते हैं पर जाने कितने ही लोग हैं जो आँखों को ही पढ़ लेते हैं ये आँखें तो आईने की तरह पाख हैं जो कभी झूठ नहीं बोलती पर इस दिल को कौन समझाय की वो राज़ आँखों को न बताए सिर्फ मेरी ही नहीं आँखें तो कुछ और भी हैं कभी जिनमे हम सोचते थे एक आंसू भी नहीं आने देंगे आज वो बरसती रहती हैं और हम बेबस से देखते हैं ये मेरी मज़बूरी है की हम उन्हें रोक नहीं सकते या फिर मेरी आँखों की इल्तजा, जो चाहती हैं उन्हें रोका न जाये जाने क्यूँ उन आँखों को देख कर मेरी आँखें उन्हें रोकने की कोशिस भी नहीं कर र...